
श्रीकान्त (बांग्ला उपन्यास)
“श्रीकान्त” शरतचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित एक आत्मकथात्मक शैली का शाश्वत सामाजिक-मानसिक उपन्यास है, जिसे बांग्ला साहित्य में महाकाव्यात्मक उपन्यास की गरिमा प्राप्त है। उपन्यास के केंद्र में नायक श्रीकान्त की जीवन-यात्रा, अनुभव, संबंध, प्रेम और समाज-परिवेश से निरंतर टकराव है। कहानी में राजलक्ष्मी, अभया, अनुपमा जैसे स्त्री-चरित्रों के माध्यम से स्त्री-मन की जटिल गहराइयों, प्रेम, त्याग, सामाजिक बंधनों और आत्मसम्मान के प्रश्नों को अत्यंत कोमलता और गहन संवेदना से उभारा गया है। यह केवल प्रेम-कथा नहीं, बल्कि मानव-मन, समाज, संबंधों और जीवन के अर्थ की खोज का मार्मिक दस्तावेज है। शरतचंद्र ने यथार्थ और भावुकता के मधुर संतुलन, सरल भाषा और भावनात्मक अंतर्दृष्टि से जीवन के विविध रंगों को सजीव रूप में चित्रित किया है। यह उपन्यास भारतीय साहित्य में संवेदनात्मक यथार्थवाद की शिखर कृति माना जाता है।
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