
नूतन नेत्र रोग विज्ञान
By Dr. Shravan Kumar Sahu and Dr. Sunil Kumar Pandey
“लोकरंजन से लोकशिक्षण” की नीति पर आधारित प्रस्तुत पुस्तक उन आयुर्वेद अध्येताओं के उत्साहवर्धन और पीड़ा निवारण का एक प्रयास है, जिनके मुख से यदा-कदा यह वाक्य निकल पड़ता है कि इतना परिश्रम अगर आयुर्वेद के बदले अन्य क्षेत्र में करते तो शायद आज अतिविशिष्ट उपलब्धियों से सम्पन्न होते। आयुर्वेद के “क्षीणा वर्धयितव्या” सिद्धान्त के अनुसार समय का सृजन ही तनाव और अवसाद के निवारण का उपाय है। इस पुस्तक के माध्यम से समय के सृजन की एक वैकल्पिक व्यवस्था पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने की चेष्टा की गयी है, जिसमें “कम समय में ईमानदारी के साथ अधिक पाने” के लक्ष्य के लिए बहुविध आलम्बनों का शालीनतापूर्वक सहारा लिया गया है। पुस्तक में शालाक्य तन्त्र का परिचय, इतिहास तथा नेत्ररोगों और उनकी चिकित्सा का शास्त्रीय विवेचन किया गया है।
₹825
Read this book in…
AI translation is optional and never overwrites the original text.
Secure payment via Razorpay - UPI, cards, netbanking & wallets
Instant access after payment, on mobile and desktop
Yours forever in your library - if access ever fails, support will fix itRefund policy
You Might Also Like
We're still hunting for the perfect recs for this book.
Reviews
₹825