
चन्द्रकांता संतति भाग-1
देवकीनन्दन खत्री की अमर कृति 'चन्द्रकांता संतति' ने हिन्दी साहित्य को एक नया आयाम दिया। इस उपन्यास में राजकुमारी चन्द्रकांता और राजकुमार वीरेंद्रसिंह की प्रेम कहानी के साथ-साथ ऐयारी और तिलिस्मी घटनाओं का अद्भुत मिश्रण है। 'चन्द्रकांता संतति' ने न केवल हिन्दी पाठकों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। खत्री की इस कृति ने साहित्य जगत में एक नई दिशा स्थापित की और उन्हें एक अमर साहित्यकार बना दिया। इस खंड में उपन्यास के भाग-1 से भाग-4 तक संकलित हैं।
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