अगणित मोती

अगणित मोती

By प्रदीप तिवारी

बाज़ारीकरण और भोगवाद के इस दौर में भाषा-संस्कृति के सवालों पर सोचने की किसे फुर्सत है! ऐसे में प्रदीप तिवारी ने बड़ी मेहनत से अवध इलाके में सदियों से प्रयुक्त होने वाली सूक्तियों और मुहावरों का संकलन किया है और नई पीढ़ी के लिए उनके भावार्थ खोलने का परिश्रम किया है। इस कृति से अवधी साहित्य-कोश की अभिवृद्धि हुई है। विदेशी भाषाओं की सूक्तियाँ सभी भारतीय नहीं पढ़ सकते, इसलिए श्री तिवारी ने एक हजार से अधिक सूक्तियों का अवधी में अनुवाद प्रस्तुत कर उन्हें सभी हिंदी भाषियों के लिए सुलभ कराया है। इस संकलन में तुलसी, वाल्मीकि, कबीर, गाँधी, प्रेमचंद, चाणक्य, बुद्ध, महावीर, नानक और विवेकानंद जैसे भारतीय चिंतकों के कथन, रामचरितमानस, महाभारत, गीता, उपनिषद, वेद, कुरान और बाइबिल की सूक्तियाँ, तथा नेपोलियन, सुकरात, अरस्तू, शेक्सपियर और आइंस्टीन जैसे पाश्चात्य महापुरुषों की उक्तियाँ समाहित हैं। देश-विदेश के महापुरुषों के अभिवचनों का यह अवधी अनुवाद संकलन की सार्वभौमिकता को दर्शाता है।

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