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- 01लिखने से पहले अपना उद्देश्य तय करें
- 02विषय पंक्ति सबसे पहले काम की बात बताए
- 03पत्र की मूल बनावट समझें
- 04वाक्य छोटे रखें, अर्थ पूरा रखें
- 05अभ्यास के लिए एक मूल नमूना
- 06उपयोगी शब्दावली कैसे चुनें
- 07ईमेल और पत्र में क्या बदलता है
- 08अनुस्मारक में नाराजगी से अधिक स्पष्टता रखें
- 09भेजने से पहले अंतिम जाँच
- 10आगे पढ़ने के लिए पुस्तकें
कार्यालयी पत्र अच्छा तब होता है, जब पढ़ने वाला पहली बार में समझ जाए कि मामला क्या है और उससे कौन सा काम अपेक्षित है। कठिन शब्दों, लंबे वाक्यों और भारी संबोधनों से पत्र अपने आप प्रभावशाली नहीं बनता।…
कार्यालयी पत्र अच्छा तब होता है, जब पढ़ने वाला पहली बार में समझ जाए कि मामला क्या है और उससे कौन सा काम अपेक्षित है। कठिन शब्दों, लंबे वाक्यों और भारी संबोधनों से पत्र अपने आप प्रभावशाली नहीं बनता। कई बार एक सीधा वाक्य उस बात को साफ कर देता है जिसे आधे पृष्ठ में भी ठीक से नहीं कहा गया था।
मान लीजिए किसी पुस्तकालय ने पुस्तकों की सूची माँगी है। उत्तर में संस्था का लंबा परिचय देने से पहले सूची भेजने की बात, उसका उद्देश्य और अगला कदम बताना अधिक उपयोगी होगा। कार्यालयी हिंदी का यही व्यावहारिक आधार है: सही तथ्य, स्पष्ट आशय और विनम्र भाषा। पत्र लिखने से पहले इन तीनों को अलग अलग समझ लेना काम आसान कर देता है।
लिखने से पहले अपना उद्देश्य तय करें
पहले एक छोटे वाक्य में लिखिए कि आपको यह पत्र क्यों भेजना है। क्या आप अनुमति माँग रहे हैं, सूचना दे रहे हैं, किसी पुराने पत्र का उत्तर भेज रहे हैं या लंबित काम की याद दिला रहे हैं? यदि उद्देश्य साफ नहीं है, तो विषय पंक्ति और मुख्य अनुच्छेद दोनों भटकने लगते हैं।
इसके बाद जरूरी तथ्य अलग कर लें। संबंधित तारीख, पत्र संख्या, संलग्न दस्तावेज, अपेक्षित कार्य और उत्तर देने वाले व्यक्ति या विभाग की जानकारी आपके पास होनी चाहिए। किसी संख्या का अनुमान लगाने के बजाय उसकी पुष्टि करें। भाषा की छोटी गलती सुधारी जा सकती है, लेकिन गलत तारीख के कारण पूरा काम गलत दिशा में जा सकता है।
पाठक की स्थिति भी सोचें। संभव है कि उसे पिछले फोन या बातचीत की जानकारी न हो। इसलिए इतना संदर्भ जरूर दें कि पत्र अपने आप समझ में आए। साथ ही, पहले से स्पष्ट बातों को बार बार दोहराकर मुख्य अनुरोध को दबाएँ नहीं।
विषय पंक्ति सबसे पहले काम की बात बताए
“आवश्यक कार्य के संबंध में” जैसी विषय पंक्ति बहुत कुछ कहने के बाद भी वास्तविक विषय नहीं बताती। उसकी जगह “पुस्तकालय प्रशिक्षण के लिए कक्ष उपलब्ध कराने के संबंध में” लिखने पर पाठक तुरंत समझ सकता है कि पत्र किस व्यवस्था से जुड़ा है।
विषय पंक्ति छोटी हो, पर अधूरी नहीं। उसमें अनुरोध का नाम और आवश्यक संदर्भ आ सकता है। यदि विषय किसी पूर्व पत्र के उत्तर से जुड़ा है, तो उसकी संख्या या तारीख मुख्य अनुच्छेद में स्पष्ट की जा सकती है। हर जानकारी को विषय में ठूँसना जरूरी नहीं है।
एक उपयोगी अभ्यास यह है कि पत्र पूरा होने के बाद केवल विषय पढ़ें। क्या उससे वास्तविक काम का अनुमान लग जाता है? यदि नहीं, तो विषय फिर लिखें। कार्यालय में खोजने, अग्रेषित करने और पुराने रिकॉर्ड से मिलाने के समय यही छोटी पंक्ति बहुत काम आती है।
पत्र की मूल बनावट समझें
सामान्य पत्र में भेजने वाले का विवरण, तारीख, प्राप्तकर्ता का पद या पता, विषय, संबोधन, मुख्य पाठ और हस्ताक्षर की जगह होती है। जरूरत के अनुसार संदर्भ, संलग्नक और प्रतिलिपि की जानकारी भी जोड़ी जाती है। अलग संस्थाओं के स्वीकृत प्रारूप अलग हो सकते हैं, इसलिए यह एक सामान्य मार्गदर्शिका है।
मुख्य पाठ का पहला अनुच्छेद विषय और संदर्भ बताए। दूसरा अनुच्छेद आवश्यक तथ्य रखे। आखिरी अनुच्छेद में अपेक्षित कार्रवाई साफ लिखी जाए। हर पत्र में ठीक तीन अनुच्छेद होना जरूरी नहीं, लेकिन यह क्रम विचारों को व्यवस्थित रखने में मदद करता है।
यदि आप किसी विभाग के निर्धारित प्रपत्र या पोर्टल पर काम कर रहे हैं, तो उसी के निर्देश प्राथमिक होंगे। सामान्य पत्र लेखन के सुझाव किसी विभागीय नियम या निर्धारित प्रक्रिया का स्थान नहीं लेते। पहले प्रारूप की आवश्यकता समझें, फिर उसके भीतर भाषा को सरल बनाएँ।
वाक्य छोटे रखें, अर्थ पूरा रखें
“आपको यह सूचित करने का कष्ट किया जा रहा है कि...” जैसे लंबे आरंभ की जगह सीधे सूचना लिखी जा सकती है। उदाहरण के लिए, “प्रशिक्षण सत्र 15 अक्टूबर को आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।” इससे तथ्य जल्दी सामने आता है और प्रस्तावित तथा निश्चित कार्यक्रम का अंतर भी बना रहता है।
एक वाक्य में एक मुख्य बात रखने की कोशिश करें। यदि तारीख, स्थान, प्रतिभागियों की संख्या और अनुमति की शर्त एक ही वाक्य में आ रही हो, तो उसे दो या तीन वाक्यों में बाँट दें। पाठक को जानकारी समझने के लिए बार बार पीछे नहीं लौटना चाहिए।
विनम्रता बनाए रखने के लिए हर पंक्ति में “कृपया” लिखना आवश्यक नहीं। अनुरोध को स्पष्ट, सम्मानजनक और उचित बनाना अधिक जरूरी है। आदेश देने का अधिकार न हो तो आदेश जैसी भाषा से बचें। जिस निर्णय की स्वीकृति बाकी है, उसे पहले से स्वीकृत बताकर प्रस्तुत न करें।
अभ्यास के लिए एक मूल नमूना
नीचे दिया गया उदाहरण काल्पनिक पुस्तकालय प्रशिक्षण के लिए बनाया गया है। यह किसी वास्तविक संस्था का पत्र या सरकारी स्वीकृत प्रारूप नहीं है। इसका उद्देश्य विचारों का क्रम दिखाना है। अपनी परिस्थिति में नाम, तारीख और तथ्य जाँचकर ही किसी नमूने का उपयोग करें।
विषय: पुस्तकालय प्रशिक्षण के लिए कक्ष उपलब्ध कराने के संबंध में।
महोदय, हमारे पुस्तकालय में नए सदस्यों के लिए 15 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक परिचय सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव है। सत्र में लगभग 20 प्रतिभागियों को पुस्तक खोज, सदस्यता प्रक्रिया और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी दी जाएगी।
इस कार्यक्रम के लिए उक्त समय पर प्रशिक्षण कक्ष उपलब्ध कराने का अनुरोध है। यदि यह समय सुविधाजनक न हो, तो कृपया कोई वैकल्पिक समय बताने की कृपा करें। आपकी पुष्टि मिलने के बाद प्रतिभागियों को अंतिम सूचना भेजी जाएगी।
इस नमूने में प्रस्ताव, उद्देश्य, संख्या और अपेक्षित उत्तर स्पष्ट हैं। इसमें ऐसा कोई वादा नहीं किया गया जो दूसरे विभाग की स्वीकृति के बिना पूरा न हो सके। अंतिम वाक्य यह भी बताता है कि प्राप्तकर्ता के उत्तर के बाद आगे क्या होगा।
उपयोगी शब्दावली कैसे चुनें
कार्यालयी लेखन में संलग्न, संदर्भ, अनुमोदन, प्रस्ताव, सूचना, विवरण और पुष्टि जैसे शब्द बार बार आते हैं। इन्हें याद करना उपयोगी है, लेकिन अर्थ समझे बिना इस्तेमाल करना भ्रम पैदा कर सकता है। “प्राप्ति” और “स्वीकृति” एक ही बात नहीं हैं। दस्तावेज मिल जाना उसके अनुमोदित हो जाने का प्रमाण नहीं है।
इसी तरह “प्रस्तावित” और “निर्धारित” में अंतर है। पहला बताता है कि व्यवस्था अभी विचार या अनुमति के स्तर पर है। दूसरा अपेक्षाकृत निश्चित व्यवस्था दर्शाता है। पत्र में गलत शब्द चुनने से सामने वाला व्यक्ति समय, संसाधन या निर्णय को लेकर गलत निष्कर्ष निकाल सकता है।
अपनी शब्द सूची बनाएँ। उसमें शब्द, उसका सरल अर्थ और आपके काम का एक वाक्य लिखें। उदाहरण के लिए, “संलग्न: साथ भेजा गया दस्तावेज; पुस्तकों की सूची संलग्न है।” इस तरीके से शब्द सिर्फ याद नहीं रहता, उसका सही उपयोग भी समझ आता है।
ईमेल और पत्र में क्या बदलता है
ईमेल में विषय, संदर्भ और मुख्य अनुरोध उतने ही महत्वपूर्ण हैं। अंतर यह है कि प्राप्तकर्ता अक्सर उसे मोबाइल पर पढ़ता है। इसलिए छोटे अनुच्छेद और स्पष्ट संलग्नक विवरण उपयोगी होते हैं। केवल “संलग्न देखें” लिखने के बजाय बताएँ कि कौन सा दस्तावेज भेजा गया है और उससे क्या करना है।
फाइल का नाम पहचानने योग्य रखें। कई अलग दस्तावेजों को एक जैसे नाम से भेजना बाद में भ्रम पैदा करता है। भेजने से पहले यह भी देख लें कि जिस संलग्नक का उल्लेख पाठ में किया गया है, वह वास्तव में जुड़ा हुआ है और सही संस्करण है।
पुरानी बातचीत आगे भेजते समय संवेदनशील या असंबंधित सामग्री पर ध्यान दें। प्राप्तकर्ता को आवश्यक संदर्भ मिले, लेकिन ऐसी जानकारी अनावश्यक रूप से न भेजी जाए जिसका इस काम से संबंध नहीं है। कार्यालयी स्पष्टता में उचित सूचना साझा करना भी शामिल है।
अनुस्मारक में नाराजगी से अधिक स्पष्टता रखें
किसी लंबित काम की याद दिलाते समय पहले पुराने पत्र का संदर्भ दें। फिर लिखें कि कौन सा उत्तर या कार्रवाई अभी बाकी है। यदि आपके अगले काम पर उसका असर पड़ रहा है, तो वह असर तथ्यात्मक भाषा में बताएँ। बिना जानकारी के देरी का कारण या किसी की नीयत तय न करें।
उदाहरण के लिए, “पूर्व में भेजी गई सूची पर आपकी पुष्टि अपेक्षित है। पुष्टि प्राप्त होने के बाद मुद्रण की व्यवस्था की जाएगी।” यह वाक्य लंबित निर्णय और उसके परिणाम दोनों बताता है। वास्तविक अंतिम तारीख हो तो उसका उल्लेख करें, लेकिन केवल दबाव बनाने के लिए मनमानी समय सीमा न जोड़ें।
भेजने से पहले अंतिम जाँच
पत्र पढ़ते समय खुद को प्राप्तकर्ता की जगह रखें। क्या उसे पता है कि मामला किस बारे में है, कौन सा दस्तावेज संबंधित है और अब उसे क्या करना है? नाम, पदनाम, संख्या और तारीख अलग से जाँचें। ये छोटे विवरण अक्सर भाषा से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
इसके बाद अनावश्यक वाक्य हटाएँ। ऐसी पंक्ति जो न संदर्भ देती है, न तथ्य और न कार्रवाई स्पष्ट करती है, शायद जरूरी नहीं है। फिर पत्र को सामान्य आवाज में पढ़ें। जहाँ साँस टूटती है या अर्थ उलझता है, वहाँ वाक्य छोटा करने की संभावना देखें।
आगे पढ़ने के लिए पुस्तकें
कार्यालयी भाषा का नियमित अभ्यास करने के लिए Pacibook पर Karyalayeen Hindi और Prashasnik Shabdawali की पुस्तक जानकारी देख सकते हैं। पहली पुस्तक का विषय कार्यालयी हिंदी है, जबकि दूसरी का शीर्षक प्रशासनिक शब्दावली पर केंद्रित है। इनके सार्वजनिक विवरण सीमित हैं, इसलिए किसी विशेष प्रारूप या अध्याय की उपलब्धता पुस्तक देखकर तय करें।
दोनों को कार्यालयी हिंदी और प्रशासनिक शब्दावली की ई-बुक्स पृष्ठ पर साथ रखकर चुनना आसान होगा। पढ़ते समय अपने काम का एक पुराना पत्र लें और उसे अधिक स्पष्ट भाषा में दोबारा लिखें। सीख का सबसे अच्छा उपयोग यही है कि अगला पत्र कम उलझन पैदा करे और अपेक्षित काम जल्दी समझ में आ जाए।
Books referenced in this guide
Every title below is available to read on Pacibook.
कार्यालयी हिंदी और प्रशासनिक शब्दावली की ई-बुक्स
A guided comparison of the books that cover this subject.
